कैसे बीमार पिता के कारण रोशन मैनम को जिंदगी में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली

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रोशन मैनम जब पूर्वोत्तर भारत में स्थित अपने गांव को छोड़ दिल्ली आए थे तो उनका पहला लक्ष्य काम ढूंढना था, जिससे वो अपने पिता की वित्तीय रूप से सहायता कर सकें।

24 वर्षीय मैनम ने कभी नहीं सोचा था कि उनका ये फैसला उन्हें ONE Championship में ले जाने वाला है। 9 अक्टूबर को ONE: REIGN OF DYNASTIES में उनका सामना ONE हेफेई फ्लाइवेट टूर्नामेंट चैंपियन लिउ पेंग शुआई से होना है।

मैनम अपने जीवन के उस सफर को भी नहीं भुला सकते, जिसने उन्हें अपने पिता के बेहद करीब ला दिया था।

उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी के पहले 15 साल घर पर ही बिताए हैं, इसलिए मैं अपने पिता के बहुत करीब हूं। 2010 तक मैं अपने गांव में रहा और उसके बाद दिल्ली आया। दिल्ली आने के बाद मैं अपने परिवार से कभी-कभी ही मिल पाता था।”

इस दौरान उनके पिता बीमार भी पड़े। मैनम ने याद करते हुए बताया कि उनके पिता को एक के बाद दूसरी बीमारी अपनी चपेट में लेती जा रही थी।

मैनम ने कहा, “मेरे पिता लंबे समय से अस्थमा से जूझ रहे थे और कई साल तक दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ा।”

“वो शराब का बहुत अधिक सेवन करते थे। 2012 से 2013 के समय में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। वो लीवर के एक रोग से पीड़ित हुए, दिल संबंधी और उन्हें किडनी संबंधी बीमारी भी हुई।”

इस कारण उनके परिवार के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि उन्हें बुरे दौर के लिए तैयार रहना चाहिए।

मैनम ने आगे कहा, “एक समय हमें ऐसा लगने लगा था कि मेरे पिता शायद अब जिंदा नहीं रह पाएंगे।”

दिल्ली में रहकर उन्होंने अलग-अलग तरह की नौकरी की, जिससे वो अपने पिता के इलाज के लिए पैसे जुटा सकें। घर पर रहकर उनकी मां एक मिल में काम कर रही थीं और अपने पति के स्वास्थ्य का भी ख्याल रख रही थीं।

मैनम ने कहा, “सौभाग्य से हम इस तरह से उन्हें बचाने में सफल रहे।”

मैनम के परिवार के लिए वो एक बहुत कठिन दौर रहा लेकिन इसी समय ने उन्हें कुछ अलग करने की प्रेरणा दी थी।

उन्होंने बताया, “इस दौर ने मुझे अंदर से मजबूत बनाया और कठिन समय से बाहर निकलने के लिए मुझे कुछ अलग करना था।”



रेसलिंग उनके लिए चुनौती से निकलने का रास्ता बनी और थोड़े ही समय में वो एक अच्छे रेसलर बन चुके थे व कई बार के नेशनल रेसलिंग चैंपियन भी बने। इससे उनके पिता बहुत प्रभावित हुए, जो सोचते थे कि उनका बेटा कभी 9 से 5 की नौकरी से बाहर ही नहीं निकल पाएगा।

मैनम ने कहा, “जब में रेसलिंग में नियमित रूप से मेडल जीत रहा था तो मेरे पिता बहुत खुश हुए। उनका मानना था कि मुझे एक दिन जरूर अच्छी नौकरी मिलेगी।”

लेकिन भारतीय स्टार के प्लान कुछ और ही थे। उन्होंने कहा, “मैंने कभी फुल टाइम जॉब ढूंढने का प्रयास ही नहीं किया।”

भारतीय युवा स्टार एक प्रोफेशनल मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट बनने का सपना देख रहे थे। क्षेत्रीय टूर्नामेंट्स में उन्हें सफलता मिलने लगी थी, 2 मैच सबमिशन और 1 TKO (तकनीकी नॉकआउट) से भी जीता।

उसी सफलता के कारण उन्होंने नवंबर 2018 में Evolve टीम में जगह बनाने के लिए टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, जहां मैनम ने जिम के कोचों को अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया और जल्द ही उन्हें टीम से जोड़ लिया गया।

उन्होंने करीब 1 साल बाद ONE: MASTERS OF FATE में अपना प्रोमोशनल डेब्यू किया और खॉन सिचान के खिलाफ पहले राउंड में सबमिशन से जीत दर्ज की।

फ्लाइवेट डिविजन पहले ही बड़े स्टार्स से भरा पड़ा था, जिसमें मैनम भी शामिल हो गए थे।

उन्होंने कहा, “Evolve टीम से जुड़ने के बाद मेरे गांव के लोग मेरा बहुत सम्मान करने लगे थे क्योंकि मैं पूर्वोत्तर भारत का पहला एथलीट था, जिसने ONE Championship में जगह बनाई थी।”

“मैं जब भी अपने गांव जाता हूं तो मुझे बहुत प्यार मिलता है। उन्हें मुझ पर गर्व महसूस होता है और मैं भी उनका सिर गर्व से ऊंचा करना चाहता हूं।”

अपने पिता को अच्छा महसूस करवाने के लिए मैनम को और भी बेहतरीन प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। उनके पिता के स्वास्थ्य के खराब होने के कारण ही उन्होंने खुद को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया था।

फ्लाइवेट स्टार ने कहा, “मेरे पिता बहुत सज्जन व सीधे व्यक्ति हैं।”

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